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Friday, January 11, 2019

21 जनवरी को होगा पूर्ण चंद्र ग्रहण

 21 जनवरी को होगा पूर्ण चंद्र ग्रहण


न्यूज18 के मुताबिक 21 जनवरी को होने वाले चंद्र ग्रहण को वैज्ञानिकों ने सुपर ब्लड वूल्फ मून नाम दिया है. यह केवल अफ्रीका, यूरोप,उत्तरी-दक्षिणी अमेरिका और मध्य प्रशांत में ही दिखाई देगा.
सूरज और चांद के बीच जब धरती आ जाती है तो इस स्थिति को चंद्र ग्रहण कहा जाता है. जब चांद धरती की छाया से निकलता है तो चंद्र ग्रहण पड़ता है. वहीं जैसे-जैसे चांद धरती के नजदीक आता है तो उसका रंग और भी चमकीला और गहरा हो जाता है.

नासा ने भविष्यवाणी की है कि समग्रता 20 जनवरी को रात 9:12 बजे होगी और लगभग एक घंटे तक रहेगी. पूरा अनुभव, ग्रहण की शुरुआत से अंत तक, तीन घंटे और 17 मिनट तक रहेगा

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के चंद्र ग्रहण में चांद सामान्य दिनों की तुलना में 14 फीसदी बड़ा और 30 फीसदी से ज्यादा चमकीला नजर आता है. जिसके कारण चांद सुर्ख लाल (गहरा भूरा) रंग का हो जाता है. रात के अंधेरे में यह नजारा काफी अद्भुत होता है. जिसके कारण इसे ब्लड मून भी कहा जाता है.

Tuesday, January 8, 2019

प्लास्टिक का इस्तेमाल






 मकान निर्माण में बालू के बजाय किया जा सकता है प्लास्टिक का     इस्तेमाल






 भारत में हर साल बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का कचरा निकलता है जिसका फिर से इस्तेमाल नहीं होता। अब एक अध्ययन के अनुसार निर्माण कार्य में बालू के बजाय प्लास्टिक का आंशिक तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है और यह देश में सतत निर्माण कार्य के लिए एक संभावित समाधान है।
ब्रिटेन में यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ और भारत में गोवा इंजिनियरिंग कॉलेज के संयुक्त शोध में यह पाया गया कि कंक्रीट में 10 प्रतिशत बालू के बजाय प्लास्टिक का इस्तेमाल करने से भारतीय सड़कों पर पड़े रहने वाले प्लास्टिक के कचरे को कम किया जा सकता है और देश में रेत की कमी से निपटा जा सकता है।
मुख्य शोधकर्ता डॉ. जॉन ओर ने कहा, ‘आम तौर पर जब आप कंक्रीट में प्लास्टिक जैसी मानव निर्मित वस्तु मिलाते हैं तो उसकी मजबूती थोड़ी कम हो जाती है क्योंकि प्लास्टिक सीमेंट में उस तरह जुड़ नहीं पाता जैसे कि रेत जुड़ती है।’ उन्होंने कहा, ‘यहां पर मुख्य चुनौती यह थी कि मजबूती में कमी नहीं आए और इस लक्ष्य को हमने हासिल किया। इसके अलावा, इसे सार्थक बनाने के लिए प्लास्टिक की उचित मात्रा का इस्तेमाल करना था। निर्माण के कुछ क्षेत्रों में यह सामग्री काम की है। इससे प्लास्टिक को रिसाइकल नहीं कर पाने और बालू की मांग को पूरा करने जैसे मुद्दों से निपटने में मदद मिल सकती है।’
यह शोध इस महीने जर्नल ‘कंसट्रक्शन ऐंड बिल्डिंग मटिरियल्स’ में प्रकाशित हुआ है और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समिति ने एटलस अवॉर्ड के लिए इसका चयन किया है। शोध दल ने विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक का अध्ययन किया, यह जाना कि क्या उनका चूरा बनाया जा सकता है और बालू के स्थान पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
This House was Built in 5 Days Using Recycled Plastic Bricks ...




https://m.navbharattimes.indiatimes.com/world/science-news/research-finds-recycled-plastic-bottles-can-be-used-for-sustainable-construction/articleshow/65963028.cms


Friday, December 21, 2018

आज 21 दिसंबर है


Winter Solstice 2018: आज साल का सबसे छोटा दिन, 



  • विंटर सोल्सटिस 21,22 या 23 दिसंबर को होता है
  • समर सोल्सिटस 20, 21, या 22 जून को होता है
  • उत्तरी गोलार्द्ध में 21 दिसंबर सबसे छोटा दिन होता है
  • पृथ्वी झुके हुए अक्ष के चारों तरफ घूमती है। इसी वजह से सीजन का बदलाव होता है।

आज 21 दिसंबर है। आज का दिन इसलिए खास है कि आज उत्तरी गोलार्द्ध के लिए साल का सबसे छोटा दिन है और सबसे लंबी रात। आज के बाद से दिन की लंबाई के साथ-साथ ठंड भी बढ़ने लगेगी। इसे इंग्लिश में Winter Solstice और हिंदी में दिसंबर दक्षिणायनकहा जाता है। तकनीकी रूप से विंटर सोल्सटिस उस समय होता है जब सूर्य सीधे मकर रेखा के ऊपर होता है।

सोल्सटिस क्यों होता है?

कभी कड़ाके की ठंड होती है तो कभी पसीना बहाने वाली गर्मी, यानी मौसम बदलता रहता है। साल में कुछ महीने गर्मी तो कुछ महीने सर्दी पड़ती है। सीजन और मौसम की तरह ही दिन और रात की लंबाइयां घटती-बढ़ती रहती है। कभी आपने यह सोचा है कि ऐसा क्यों होता है। चलिए अगर नहीं सोचा है तो आज जान लीजिए। यह सब सिर्फ एक वजह से होता है और वजह धरती का झुके हुए अक्ष पर घूमना है। इसी कारण साल के आधे समय तक सूर्य उत्तरी ध्रुव की ओर झुका होता है तो बाकी आधे सालों में दक्षिण ध्रुव की ओर। इससे सीजन तय होता है। जिस तरफ सूर्य का झुकाव ज्यादा होगा और ज्यादा से ज्यादा सूर्य प्रकाश वहां पहुंचेगा, वहां गर्मी का मौसम होगा। दूसरी ओर जिस तरफ सूर्य का प्रकाश कम पहुंचेगा, वहां ठंड होगी। पृथ्वी अपने अक्ष पर साढे 23 डिग्री झुकी हुई है, जिसके कारण सूर्य की दूरी उत्तरी गोलार्द्ध से अधिक हो जाती है। 
Winter Solstice के दौरान दक्षिणी गोलार्द्ध को सूर्य का प्रकाश ज्यादा प्राप्त होता है जबकि उत्तरी गोलार्द्ध को कम। ऐसा 21,22 या 23 दिसंबर को होता है। इससे उत्तरी गोलार्द्ध में दिन छोटा होता है और रात लंबी। 

Notes

  • विंटर सोल्सटिस का संबंध संक्रांति से भी बताया जाता है। ऐसा मानना है कि करीब 1700 साल पहले आज ही के दिन मकर संक्रांति मनाई जाती थी जिसे अब 14 जनवरी को मनाया जाता है। 


Saturday, December 1, 2018

भूकंप की चेतावनी


भूकंप की चेतावनी: वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालय क्षेत्र में कभी भी आ सकता है 8.5 तीव्रता का भूकंप


जवाहरलाल नेहरू सेंटर के भूकंप (Earthquake) विशेषज्ञ सीपी राजेंद्रन का कहना है कि इस क्षेत्र में भारी मात्रा में तनाव भविष्य में केंद्रीय हिमालय में तीव्रता का भूकंप (Earthquake in Himalayas) ला सकता है.


वैज्ञानिकों की मानें तो हिमालय क्षेत्र के आसपास जिस तरह के भौगोलिक घटनाएं  हो रही हैं, उसे देखते हुए यह साफ है कि इस इलाके में 8.5 तीव्रता का भूकंप (Earthquake) कभी भी आ सकता है. शोधकर्ताओं ने भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के कार्टोसैट -1 उपग्रह से गूगल अर्थ और इमेजरी का उपयोग करने के अलावा भूगर्भीय सर्वेक्षण के भारत द्वारा प्रकाशित स्थानीय भूविज्ञान और संरचनात्मक मानचित्र का उपयोग किया है.शोधकर्ताओं के विश्लेषण में बताया गया है कि "अध्‍ययन हमें यह निष्कर्ष निकालने के लिए मजबूर करता है कि केंद्रीय हिमालय में 15 मीटर की औसत सरकने के कारण 1315 और 1440 के बीच खिंचाव 8.5 या उससे अधिक तीव्रता का एक बड़ा भूकंप क्षेत्र लगभग 600 किमी तक फैला है.
बता दें कि इससे पहले नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (एनटीयू) की अगुवाई में एक रिसर्च टीम ने भी पाया था कि मध्य हिमालय क्षेत्रों में रिएक्टर पैमाने पर आठ से साढ़े आठ तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आने का खतरा है. शोधकर्ताओं ने एक बयान में कहा कि सतह टूटने संबंधी खोज का हिमालय पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े इलाकों पर गहरा असर हो रहा है. अमेरिका के भू-वैज्ञानिक रोजर बिल्हम जिनका पूरा जीवन भूंकप और इससे जुड़ी चीजों की खोज पर ही बीता है ने भी भारतयी वैज्ञानिकों की इस चेतावनी का समर्थन किया है.उन्होंने कहा कि भारत के वैज्ञानिकों ने जो संभावना जताई है उसपर किसी भी तरह का शक नहीं किया जा सकता.

Wednesday, November 14, 2018

ISRO का सैटेलाइट भारत को मोबाइल संचार उपलब्ध कराएगा


इसरो के नाम नई कामयाबी





भारतीय सेटेलाइट GSAT- 6A ने गुरुवार को श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र से सफलतापूर्वक उड़ान भरी। जीसैट-6ए उच्च शक्ति का एस-बैंड संचार उपग्रह है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार,  14 नवम्बर को 1:56 बजे इसकी लॉन्चिंग की उल्टी गिनती शुरू कर दी थी। ये सेटेलाइट गुरुवार को लगभग 4:56 बजे जीएसएलवी- एफ08 के साथ प्रक्षेपित किया गया। इस सेटेलाइट का वजन 2140 किलोग्राम है। 




उपलब्धियाँ

  • यह एक कम्युनिकेशन सेटेलाइट है.
  • यह उपग्रह मल्टी-बीम कवरेज सुविधा के जरिए भारत को मोबाइल संचार उपलब्ध कराएगा.
  • इसकी लांचिंग के बाद हम इसकी बदौलत जम्मू कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट पर निगरानी रखने में ज्यादा मददगार होगा।
  • जीसैट-6ए सैटेलाइट किसी सामान्‍य संचार उपग्रह से बहुत खास है.
  • जीसैट-6 ए भारत में सैटेलाइट आधारित मोबाइल कॉलिंग और कम्‍यूनीकेशन को बहुत आसान बनाने में दमदार रोल प्‍ले करेगा.
  • जीसैट-6 ए खासतौर पर सेनाओं के बीच दूरस्‍थ स्‍थानों से होने वाली कॉलिंग को आसान बनाएगा.

Friday, November 2, 2018

दुनिया की सबसे ऊंची सरदार पटेल की प्रतिमा


गुजरात में सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा का प्रधानमंत्री मोदी ने किया अनावरण.



सरदार वल्लभ भाई पटेल( Vallabhbhai Patel) की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' (Statue of Unity) का 31 अक्टूबर को अनावरण हो गया. उनकी 143 वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य समारोह में अनावरण किया. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि कौटिल्य की कूटनीति और शिवाजी के शौर्य के समावेश थे सरदार पटेल. उन्होंने कहा कि जब सबको लगता था कि देश ऐसे ही बिखरा रहेगा, ऐसे निराशा के दौर में सरदार पटेल ही आशा की किरण थे. अपनी ऊंचाई के कारण यह प्रतिमा अब दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति बन गई है. दुनिया में अब दूसरे स्थान पर चीन में स्प्रिंग टेंपल में बुद्ध की मूर्ति है, जिसकी ऊंचाई 153 मीटर है. सरकार आमदनी के लिए टिकट भी लगाएगी. यह प्रतिमा नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. मूर्ति बनाने वाली कंपनी एलएंडटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक एस एन सुब्रमण्यन ने कहा, "स्टैच्यू आफ यूनिटी जहां राष्ट्रीय गौरव और एकता की प्रतीक है वहीं यह भारत के इंजीनियरिंग कौशल तथा परियोजना प्रबंधन क्षमताओं का सम्मान भी है." इस मूर्ति के प्रमुख शिल्पकार 92 वर्षीय राम वी. सुतार हैं.




  • सरदार पटेल की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को देखने के लिए 350 रुपये खर्च करने पड़ेंगे. साथ ही अगर आप परिसर में बस की सुविधा लेते हैं तो 30 रुपये और देने पड़ेंगे. 
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरदार पटेल की प्रतिमा का दर्शन करने आने वाले टूरिस्ट सरदार सरोवर डैम, सतपुड़ा और विंध्य के पर्वतों के दर्शन भी कर पाएंगे.
  • चीन स्थित स्प्रिंग टेंपल की 153 मीटर ऊंची बुद्ध प्रतिमा के नाम अब तक सबसे ऊंची मूर्ति होने का रिकॉर्ड था. मगर सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा ने अब चीन में स्थापित इस मूर्ति को दूसरे स्थान पर छोड़ दिया है. 182 मीटर ऊंचे 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का आकार न्यूयॉर्क के 93 मीटर उंचे 'स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी' से दोगुना है. 
 For more details 
 https://khabar.ndtv.com/news/file-facts/statue-of-unity-know-all-about-sardar-vallabhbhai-patel-statue-1940505/amp/1?akamai-rum=off

Thursday, November 1, 2018

‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवार्ड '



PM मोदी को मिला UN का सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवार्ड’, बोले- हम प्रकृति में परमात्मा को देखते हैं



PM मोदी को दिल्ली में बुधवार को आयोजित एक विशेष समारोह में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार ‘‘चैंपियंस ऑफ अर्थ द अवार्ड’’ से सम्मानित किया गया. संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटारेस ने पर्यावरण के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' अवॉर्ड से सम्मानित किया. इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत के लिए बहुत ही गौरव का दिन है, आज संयुक्त राष्ट्र द्वारा भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को 'Champions of the Earth' का अवार्ड दिया गया. उन्होंने कहा कि हम Earth को Planet नहीं मानते हैं, पृथ्वी हमारे लिए ग्रह नहीं है, पृथ्वी हमारे लिए मां है. भारत में जब भवन बनाए जाते हैं तो भूमि-पूजन किया जाता है. वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने कहा कि पीएम मोदी ने (पर्यावरण के क्षेत्र में) जिस नेतृत्व का प्रदर्शन किया है, दुनिया में उसकी कमी है. ग्रीन इकोनॉमी का आने वाले दशक में बड़ा योगदान होगा.


Source of the news
https://khabar.ndtv.com/news/world/dust-storms-on-saturns-moon-titan-spotted-for-the-first-time-1922202

Monday, October 29, 2018

शहरों को रोशन करने के लिए अपना 'चांद' बना रहा चीन


कृत्रिम चंद्रमा' लांच करने की तैयारी में जुटा चीन

 


अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट से जुड़ी कुछ ही जानकारियों को साझा किया है। यह विचार एक फ्रांसीसी कलाकार की कल्पना से प्रेरित है, जिसमें उसने धरती को चारों ओर से दर्पणों की माला से घेरने की बात कही थी। चेंगदू एयरोस्पेस साइंस एवं टेक्नोलॉजी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम रिसर्च इंस्टीट्यूट कंपनी लिमिटेड के चेयरमैन वू चुनफेड ने इस परियोजना का खुलासा किया। 




चीन का एक शहर कृत्रिम चंद्रमा लांच करने की तैयारी में है। यह कृत्रिम उपग्रह धरती पर करीब 80 किलोमीटर के दायरे को रोशन करेगा। खास बात यह कि यह कृत्रिम चंद्रमा वास्तविक चंद्रमा की अपेक्षा आठ गुना अधिक चमकीला होगा। अभी तक प्रकाशक उपग्रह के रूप में प्रचारित किए जा रहे इस उपग्रह को चेंगदू शहर के दक्षिण पश्चिम इलाके के ऊपर 2020 तक स्थापित किया जाएगा। इंसान का बनाया पहला चांद शिचुआन के शिचांद सेटेलाइट लॉन्च सेंटर से छोड़ा जाएगा. 





फायदे



  • बिजली के खर्च को घटाना चाहता है.
  • यह उपग्रह असली चांद जैसे ही चमकेगा लेकिन इसकी रोशनी उस चांद की तुलना में आठ गुना ज्यादा होगी.
  • 50 वर्ग किलोमीटर के इलाके में करीब 17 करोड़ डॉलर की हर साल बचत होगी.
  • रोशनी का यह जरिया आपदा या संकट से जूझ रहे इलाकों में ब्लैकआउट की स्थिति में राहत के कामों में भी बड़ा मददगार होगा.



नुकसान


  • रोशनी की वजाहा से निंद का पुरा ना होना.
  • चेंगदू शहर की कृत्रिम चंद्रमा से संबंधित परियोजना का विरोध भी शुरू हो गया है।
  • पशु-प्राणियों से लेकर अंतरिक्ष से जुड़ी वेधशालाओं तक पर विपरीत असर पड़ सकता है। 






यह पहली बार नहीं है जब इंसान आकाश में प्रकाश को परावर्तित करने वाले उपकरण लगाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि इस दिशा में अभी तक के प्रयास असफल रहे हैं।